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Sunday, February 14, 2010
बच्चों के तुतलाहट का इलाज
ND ND
1 सबसे पहले बच्चे को नाक-कान-गले के विशेषज्ञ के पास ले जाएँ और शारीरिक कारणों का पता लगाएँ।
2 आई.क्यू. लेवल का कम या अत्यधिक कम होना : आई.क्यू. टेस्ट द्वारा पता करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास ले जाएँ।
3 अगर शारीरिक त्रुटियाँ हों तो उन्हें दूर करने का प्रयास करें।
4 घर और स्कूल में ऐसे बच्चों को बोलने के लिए प्रेरित करें।
5 बच्चे का मजाक न उड़ाएँ बल्कि प्रेम से पेश आएँ।
6 अगर बच्चे की याददाश्त कमजोर हो तो उसे विकसित करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
7 स्पीच थैरेपिस्ट, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की सलाह से बच्चे के स्पीच का विकास करने का प्रयास करें।
रितिक रोशन पहले हकलाते थे। हकलाना शर्म की बात नहीं
मुंबई। आज पर्दे पर धड़ल्ले से डायलॉग बोलने वाले बॉलीवुड के सुपरस्टार ऋतिक रोशन बचपन में हकलाते थे। वो एक लाइन साफ नहीं बोल पाते थे। उनकी बातें लोगों को समझ में नहीं आती थीं।
फराह खान के टीवी शो तेरे-मेरे बीच में में ऋतिक ने खुद ये खुलासा किया कि वे आज भी एक घंटे रोज स्पीच थेरेपी लेते हैं, जिससे कि वो दोबारा हकलाना ना शुरू कर दें। ऋतिक ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे कहा था कि तुम कभी एक्टर नहीं बन पाओगे। तुम 21 साल के हो, कुछ और क्यों नहीं करते।
ऋतिक जब छह साल के थे तभी उन्हें एहसास हो गया कि वो हकलाते हैं। उनकी जिंदगी में कई बार शर्मिंदगी भरे पल आए, जब वो किसी को अपनी बात नहीं समझा पाते थे। यहां तक कि वो ये भी नहीं बोल पाते थे कि वो एक्टर बनना चाहते हैं।
ऋतिक को कभी डॉक्टरों ने ये भी साफ कह दिया था कि वो पूरी जिंदगी में कभी डांस नहीं कर सकते क्योंकि बचपन में ऋतिक की पीठ में डिस्क प्रॉब्लम थी। उनका ज्यादातर वक्त बिस्तर पर ही बीतता था। ऋतिक के मुताबिक हकलाने की आदत दूर करने के लिए उन्होंने अपनी जुबान और जबड़े के बीच संतुलन साधना शुरू किया।
इस बारे में ऋतिक ने बताया कि जब मैं एक टीनएजर हुआ तो मैंने तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है और मैंने अपनी कमजोरी पर काम करना शुरू कर दिया। मैं किसी अक्षर पर ना अटक जाऊं इसके लिए मैंने A से Z तक के अक्षरों को अलग-अलग तरीकों से पढ़ना शुरू किया। मुझे याद है एक बार, मैंने 36 घंटे तक एक वाक्य को साफ बोलने की प्रैक्टिस की जिससे मैं अपने कुक को बिना अटके ये बता सकूं कि मुझे खाने में क्या चाहिए। ऋतिक की पहली फिल्म कहो ना प्यार है की रिलीज के बाद एक अवॉर्ड फंक्शन में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ऋतिक ने बताया कि जब मुझे दुबई में हुए एक अवॉर्ड फंक्शन में बेस्ट डेब्यू का अवॉर्ड मिला तो मैं अपनी स्पीच में आई लव यू दुबई कहना चाहता था। मगर मैं दुबई शब्द ठीक से नहीं बोल पा रहा था। मैं अपने होटल के कमरे में इसकी प्रैक्टिस करना चाहता था लेकिन मुझे ये चिल्ला कर बोलना था इसलिए मैं ये अपने कमरे में नहीं कर सकता था। होटल के उस कमरे में एक बड़ी अलमारी थी। मैंने खुद को उस अलमारी में बंद किया और वहां दुबई बोलने की प्रैक्टिस की। आखिरकार मैंने अवॉर्ड फंक्शन में ये वाक्य बिना अटके कह डाला।
ऋतिक ने बताया कि आज भी रात को सोने से पहले एक घंटे स्पीच थेरेपी लेते हैं ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। हाल ही में उन्होंने एक स्पीच थेरेपी इंस्टीट्यूट खोला है, ताकि उनके जैसे लोगों को मदद मिल सके।
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फराह खान के टीवी शो तेरे-मेरे बीच में में ऋतिक ने खुद ये खुलासा किया कि वे आज भी एक घंटे रोज स्पीच थेरेपी लेते हैं, जिससे कि वो दोबारा हकलाना ना शुरू कर दें। ऋतिक ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे कहा था कि तुम कभी एक्टर नहीं बन पाओगे। तुम 21 साल के हो, कुछ और क्यों नहीं करते।
ऋतिक जब छह साल के थे तभी उन्हें एहसास हो गया कि वो हकलाते हैं। उनकी जिंदगी में कई बार शर्मिंदगी भरे पल आए, जब वो किसी को अपनी बात नहीं समझा पाते थे। यहां तक कि वो ये भी नहीं बोल पाते थे कि वो एक्टर बनना चाहते हैं।
ऋतिक को कभी डॉक्टरों ने ये भी साफ कह दिया था कि वो पूरी जिंदगी में कभी डांस नहीं कर सकते क्योंकि बचपन में ऋतिक की पीठ में डिस्क प्रॉब्लम थी। उनका ज्यादातर वक्त बिस्तर पर ही बीतता था। ऋतिक के मुताबिक हकलाने की आदत दूर करने के लिए उन्होंने अपनी जुबान और जबड़े के बीच संतुलन साधना शुरू किया।
इस बारे में ऋतिक ने बताया कि जब मैं एक टीनएजर हुआ तो मैंने तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है और मैंने अपनी कमजोरी पर काम करना शुरू कर दिया। मैं किसी अक्षर पर ना अटक जाऊं इसके लिए मैंने A से Z तक के अक्षरों को अलग-अलग तरीकों से पढ़ना शुरू किया। मुझे याद है एक बार, मैंने 36 घंटे तक एक वाक्य को साफ बोलने की प्रैक्टिस की जिससे मैं अपने कुक को बिना अटके ये बता सकूं कि मुझे खाने में क्या चाहिए। ऋतिक की पहली फिल्म कहो ना प्यार है की रिलीज के बाद एक अवॉर्ड फंक्शन में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ऋतिक ने बताया कि जब मुझे दुबई में हुए एक अवॉर्ड फंक्शन में बेस्ट डेब्यू का अवॉर्ड मिला तो मैं अपनी स्पीच में आई लव यू दुबई कहना चाहता था। मगर मैं दुबई शब्द ठीक से नहीं बोल पा रहा था। मैं अपने होटल के कमरे में इसकी प्रैक्टिस करना चाहता था लेकिन मुझे ये चिल्ला कर बोलना था इसलिए मैं ये अपने कमरे में नहीं कर सकता था। होटल के उस कमरे में एक बड़ी अलमारी थी। मैंने खुद को उस अलमारी में बंद किया और वहां दुबई बोलने की प्रैक्टिस की। आखिरकार मैंने अवॉर्ड फंक्शन में ये वाक्य बिना अटके कह डाला।
ऋतिक ने बताया कि आज भी रात को सोने से पहले एक घंटे स्पीच थेरेपी लेते हैं ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। हाल ही में उन्होंने एक स्पीच थेरेपी इंस्टीट्यूट खोला है, ताकि उनके जैसे लोगों को मदद मिल सके।
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सम्मोहन चिकित्सा द्वारा हकलाना, तुतलाना
प्राय: सभी क्रियागत रोगो मे सम्मोहन लाभदायक है कुछ ऐसे शारीरक रोग होते है जिनके मूल कारण तो मनोवैज्ञानिक होते है, लेकिन उनके साथ शारीरक कारण भी मिश्रित होते है,ऐसे रोगो मे शारीरक चिकित्सा भी होनी चाहिए । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा बुरी आदते शराब, सिगरेट से पुर्ण छुटकारा दिलाया जा सकता है । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा अनेक निम्न रोगो मे लाभ होता है । सिरदर्द, कमर दर्द, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विषाद, लकवा, मिर्गी, कमजोर यादाश्त, हकलाना, तुतलाना, ह्रदय रोग, डर, नंपुसकता, कब्ज, मोटापा, कमजोर आखें, मनोविकार इत्यादि।
बहुत से लोगो की धारणा है की केवल कमजोर इच्छा-शक्ति वाले व्यक्ति को ही सम्मोहित किया जा सकता है, लेकिन यह गलत है, इसके विपरीत द्र्ड इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति को आसानी से सम्मोहित किया जा सकता । हर व्यक्ति को सम्मोहित करने का तरीका समान नही हो सकता । व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर रहता है । पात्र के सुझाव ग्रहण करने की क्षमता को बहुत बढाया जा सकता है उसे कहा जाए कि तुम अभिनेता दिलीप कुमार हो तो वह दिलीप कुमार जैसी अदा दिखलाएगा । अपने को दिलीप कुमार ही मान बैठेगा । सम्मोहन की तन्द्रा मे कभी कभी पात्र को वे सुझाव भी दिए जाते है जिनका संबंध सत्य से परे होता है सम्मोहन के द्वारा व्यक्ति को उसके बचपन की किसी भी अवस्था तक ले जाया जा सकता है अपने गर्भावस्था तक के विषय मे व्यक्ति बता सकता है कुछ सम्मोहन शास्त्रियों का दावा है कि पिछले जन्म के बारे मे भी पात्र से बातें मालुम कर सकते है । इस पर खोज और शोध का सिलसिला जारी है इस मे कुछ आंशिक सफ़लता मिली है अभी हाल ही मे दो तीन व्यक्तियों को सम्मोहित किया और इस लौटाने की प्रक्रिया मे उन्हे धीरे धीरे गर्भावस्था और पिछले पिछले जन्म तक ले जाया गया ।
इसी तरह एक दुसरी लड़ ने बताया कि वह गुजरांवाला के किसी बहुत बड़े हिन्दु परिवार पैदा हुई थी । बचपन मे किसी बिमारी के कारण इसकी मृत्यु हो गई थी । यदपि यह पता लगाना भले ही असंभव हो तथापि किसी भी व्यक्ति को उसकी बचपन की स्थिति तक तो लौटाया जा सकता है । एक रोगिनी की आखें 12 वर्ष की उम्र मे खराब हो गई थी, तब से वह निरंतर चश्मा लगाया करती थी । सम्मोहन तन्द्रा के दौरान जब रोगिनी को 10 वर्ष की अवस्था मे ले जाया गया तो वह बिना चश्मा के पढने लगी । जो परेशानियां उसे चश्मा नही लगाने से होती थी अब चश्मा लगाने से होने लगी । इसके अतिरिक्त व्यक्ति जब जिस उम्र मे ले जाया जाए वह अपनी इस अवस्था की सारी छिपी या प्रगट बाते बतला देगा 76 प्रतिशत तक बातें इनमे सही निकलती है । सम्मोहन मे सम्मोहन करने वाले और सम्मोहित किए जाने वाले के एक तरह का संबंध जुड़ जाता है । जो भी सुझाव वह देता है पात्र सहजता से मानता चला जाता है । क्या सम्मोहन हर व्यक्ति पर किया जा सकता है ? अब तक इस पर व्यापक रुप से सर्वेक्षण नही किया गया है । कहीं-कहीं पर सामूहिक रुप से सम्मोहित करने के परीक्षण किए गए । कुल 5 वर्गो मे सबको विभाजित किया जा सकता है - 1 कुछ लोग सम्मोहित नही होते, 2 कुछ मांसपेशियो का तनाव कम हो जाता है और पलकें झपकने लगती है, 3 कुछ लोग तन्द्रा की स्थिति मे चला जाते है और छूने पर कुछ भी अनुभव नही करते है, 4 इस वर्ग के लोग समाधिस्त हो जाते है । ये उस समय भी सुझाव मानते है और तन्द्रा टुट जाने पर भी सुझावो का पालन करते है केवल 15 प्रतिशत लोग पहले वर्ग मे आते है, जिन्हे आसानी से सम्मोहित हो जाते है । 40 प्रतिशत सो जाते है और छुकर कुछ न अनुभव करने की स्थिति मे उन्हे पहुचाया जा सकता है । 15 प्रतिशत को समाधिस्त अवस्था तक पहुचाया जा सकता है तथा शेष 20 प्रतिशत को गहन समाधि अवस्था तक पहुचाया जाता है इस सारे प्रयोगो से यह बात सिद्ध होती है की शायद सभी व्यक्तियों को सम्मोहित किया जा सकता है यदि सम्मोहन करने वाले का अपने पात्र से संबंध जुड़ जाए । हो सकता है सम्मोहित होने पर व्यक्ति दिए गए सुझावों का पालन करता है तन्द्रा मे ही नही, तन्द्रा के बाद भी उन सुझावो का पालन करना अनिवार्य समझता है । ये सुझाव इतने प्रभावकारी होते है कि इनसे व्यक्ति के बहुत से मानसिक रोग दुर किए जा सकते है किसी को तन्द्रा मे सुझाव दिया जाए सिगरेट पीते ही तुम्हारा सिर भारी होने लगेगा और तुम्हें चक्कर आएगें । जागने जब कभी यह सिगरेट पीने का प्रयास करेगा, उसका सिर भारी हो उठेगा और चक्कर आने लगेगें। इस तरह से उसे वस्तु के प्रति अरुचि पैदा हो जाएगी । इसी तरह शराब, जुआ आदि बुरी लतों से व्यक्ति आसानी से मुक्त हो सकता है मानसिक व्याधियां ही बहुत सी व्याधियो की जड़ है मानसिक रुप से यदि व्यक्ति को स्वस्थ, प्रफ़ुल्ल रखा जा सके तो संसार की आधि से अधिक बुराईयां समाप्त हो सकती है । हमारे मन एवं मस्तिष्क में बहुत सी ग्रन्थियां पैदा हो जाती है सम्मोहन से उनका कारण ढुंढ कर उनका निवारण किया जा सकता है बहुत सी पीड़ाओं एंव बिमारियों का जन्म हमारे विश्वास एंव संवेग के कारण होता है महिलाओं मे बचपन से यह विश्वास भर दिया जाता है कि प्रसव के समय उन्हे अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ता है यह बात हर बालिका के मन मे घर कर जाती है । इसलिए प्रसव के दौरान उसका अचेतन उसी के दर्द के अनुसार दर्द महसुस करने के लिए विवश करता है संसार के दुसरे कि स्त्रियों के अनुभवो से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रसव के समय स्त्री को बहुत अधिक दर्द महसुस करने कि जरुरी नही । विभिन्न अंगो को सम्मोहन द्वारा सुन्न करके आसानी से आप्रेशन किया जा सकता है रोगी को पता ही नही चलेगा की आप्रेशन किया जा रहा है मेरे पास एक ऐसा बालक आया जो मानसिक रोगी था । जिसे घर वालो ने ही नही अस्पताल वालो ने भी पागल घोषित कर दिया था । उन्होने उसके अच्छे होने की सभी संभावनाए छोड़ दी थी, इस बालक की सारी बातें सुनकर पता लगा कि बालक प्यार और सहानुभूति का भूखा है इसलिए ऐसा करता रहता था । सम्मोहन चिकित्सा के दौरान तन्द्रावस्था में बालक ने रोग का उपरोक्त कारण बताया । जब उसके माता-पिता को समझाने पर अपने व्यवहार मे परिवर्तन किया जिससे बालक अपने उपेक्षित न समझे तब इसके फ़लस्वरुप बालक पूर्ण स्वस्थ हो गया । जब तक मानसिक रोगी के रोग का मुल कारण न खोजा जाए, तब तक कोई भी सुझाव कारगर न हो पाता । कई बार एक विकार को समाप्त करने मे कई और विकारो को जन्म हो जाता है । सम्मोहन तन्द्रा में उस मुख्य ग्रन्थि का शीघ्र पता चल जाता है जो रोगी के विकास मे बाधक बनी हुई थी। एक रोगी सहानुभूति की आवश्यकता अनुभव पड़ने पर वह दमे के दौरे को आमत्रिंत कर लेता था जब उसके परिवार को हकीकत मालुम पडी और उनके व्यवहार मे परिवर्तन आया, रोगी के दौरे मे सुधार होने लगा । मेरे मतानुसार स्म्मोहन चिकित्सा तभी चिरकालिक सफ़ल सिद्ध हो सकती है जब रोगी के रोग से संबंधित लोगो की भी स्वभाव परिवर्तन हेतु चिकित्सा की जाए। अनेक विद्दार्थियों की स्मरण शक्ति मे चम्तकारिक सुधार सम्मोहन चिकित्सा के बाद आया । सम्मोहन द्वारा कार्यक्षमता मे भी वृद्धि कुछ लोगो मे की गई। आजकल रुस, अमेरिका, फ़्रांस आदि देशो मे सम्मोहन के माधयम से बहुत कार्य किए जा रहे है। किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखने से पुर्व उसे सम्मोहित किया जाता है और सुझाव दिए जाते है कि उस क्षेत्र मे अधिक कुशलता से कार्य करने के लिए उसे क्या क्या करना चाहिए। बहुत सी जगहों मे तो अभिनेताओं, लेखको और चित्रकारो को भी सुझाव दिए जा रहे है, ताकि वे अपन क्षेत्र मे बहुत अधिक सफ़लता प्राप्त करें सकें । कम समय मे विद्दार्थी को अधिक से अधिक सिखाने के लिए भी सम्मोहन का सहारा लिया जा रहा है रोग 2 प्रकार के होते है। एक वे जिनके कारण और कार्यक्षेत्र पुर्णत: शारीरक होते है इन्हे शरीर रोग कहा जाता है। दुसरे वे जिनके मूलत: मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन लक्षण पुर्णत: शारीरक होते है उनमें सम्मोहन से कोई लाभ नही होता । हां आपरेशन, दंत, प्रसुति आदि मे सम्मोहन द्वारा उनको पीड़ारहित बनाया जा सकता है अनेक शारीरक रोग ऐसे भी होते है जिनके कारण मनौविज्ञानिक होते है ऐसे रोगो को क्रियागत्त रोग (फ़लस्वरुप डिसीस) कहते है । प्राय: सभी क्रियागत रोगो मे सम्मोहन लाभदायक है कुछ ऐसे शारीरक रोग भी होते है जिनके मूल कारण तो मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन उसके साथ कुछ शारीरक कारण भी मिश्रित होते है, ऐसे रोगो मे शारीरक चिकित्सा के साथ सम्मोहन चिकित्सा होनी चाहिए । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा बुरी आदते शराब, सिगरेट से पुर्ण छुटकारा दिलाया जा सकता है सम्मोहन चिकित्सा द्वारा अनेक रोगी निम्न रोगो से लाभान्वित हुए।
सिरदर्द, कमर दर्द, पीठ दर्द, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विषाद, लकवा, मिर्गी, कमजोर यादाश्त, हकलाना, तुतलाना, ह्रदय रोग, डर, नपुंसकता, कब्ज, मोटापा, कमजोर आखें, मनोविकार एंव अन्य ।
अपराधियों के अपराध का पता लगाने मे सम्मोहन बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है अपराधी को तन्द्रा की स्थिति मे पहुचाकर उसके जीवन के सारे अज्ञात रहस्य उजागर किए जा सकते है मैने बहुत से रोगियो का इलाज टेलीफ़ोन द्वारा भी किए है वह दिन दुर नही जब सम्मोहन चिकित्सा अपने क्षेत्र मे अस्वस्थ और स्वस्थ व्यक्तियो को रोगो के अज्ञात कारणो का पता करके लाभान्वित कर सकेगा ।
म्मोहन चिकित्सा के नए आयाम तंत्र मंत्र मन्त्र वशीकरण तन्त्र मन्त्र महामृत्य गायत्री सरस्वती मंत्र सम्मोहन महामृत्युंजयर तांत्रिक साधना वशीकरण वशीकरण कामदेव और जादू त्राटक साधना सम्मोहित करने त्राटक का जप तन्त्र शास्त्र सिद्ध स्तोत्र यन्त्र का जाप सरस्वती कात्यायनी सरस्वती सरस्वती साधना वशीकरण कर
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बहुत से लोगो की धारणा है की केवल कमजोर इच्छा-शक्ति वाले व्यक्ति को ही सम्मोहित किया जा सकता है, लेकिन यह गलत है, इसके विपरीत द्र्ड इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति को आसानी से सम्मोहित किया जा सकता । हर व्यक्ति को सम्मोहित करने का तरीका समान नही हो सकता । व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर रहता है । पात्र के सुझाव ग्रहण करने की क्षमता को बहुत बढाया जा सकता है उसे कहा जाए कि तुम अभिनेता दिलीप कुमार हो तो वह दिलीप कुमार जैसी अदा दिखलाएगा । अपने को दिलीप कुमार ही मान बैठेगा । सम्मोहन की तन्द्रा मे कभी कभी पात्र को वे सुझाव भी दिए जाते है जिनका संबंध सत्य से परे होता है सम्मोहन के द्वारा व्यक्ति को उसके बचपन की किसी भी अवस्था तक ले जाया जा सकता है अपने गर्भावस्था तक के विषय मे व्यक्ति बता सकता है कुछ सम्मोहन शास्त्रियों का दावा है कि पिछले जन्म के बारे मे भी पात्र से बातें मालुम कर सकते है । इस पर खोज और शोध का सिलसिला जारी है इस मे कुछ आंशिक सफ़लता मिली है अभी हाल ही मे दो तीन व्यक्तियों को सम्मोहित किया और इस लौटाने की प्रक्रिया मे उन्हे धीरे धीरे गर्भावस्था और पिछले पिछले जन्म तक ले जाया गया ।
इसी तरह एक दुसरी लड़ ने बताया कि वह गुजरांवाला के किसी बहुत बड़े हिन्दु परिवार पैदा हुई थी । बचपन मे किसी बिमारी के कारण इसकी मृत्यु हो गई थी । यदपि यह पता लगाना भले ही असंभव हो तथापि किसी भी व्यक्ति को उसकी बचपन की स्थिति तक तो लौटाया जा सकता है । एक रोगिनी की आखें 12 वर्ष की उम्र मे खराब हो गई थी, तब से वह निरंतर चश्मा लगाया करती थी । सम्मोहन तन्द्रा के दौरान जब रोगिनी को 10 वर्ष की अवस्था मे ले जाया गया तो वह बिना चश्मा के पढने लगी । जो परेशानियां उसे चश्मा नही लगाने से होती थी अब चश्मा लगाने से होने लगी । इसके अतिरिक्त व्यक्ति जब जिस उम्र मे ले जाया जाए वह अपनी इस अवस्था की सारी छिपी या प्रगट बाते बतला देगा 76 प्रतिशत तक बातें इनमे सही निकलती है । सम्मोहन मे सम्मोहन करने वाले और सम्मोहित किए जाने वाले के एक तरह का संबंध जुड़ जाता है । जो भी सुझाव वह देता है पात्र सहजता से मानता चला जाता है । क्या सम्मोहन हर व्यक्ति पर किया जा सकता है ? अब तक इस पर व्यापक रुप से सर्वेक्षण नही किया गया है । कहीं-कहीं पर सामूहिक रुप से सम्मोहित करने के परीक्षण किए गए । कुल 5 वर्गो मे सबको विभाजित किया जा सकता है - 1 कुछ लोग सम्मोहित नही होते, 2 कुछ मांसपेशियो का तनाव कम हो जाता है और पलकें झपकने लगती है, 3 कुछ लोग तन्द्रा की स्थिति मे चला जाते है और छूने पर कुछ भी अनुभव नही करते है, 4 इस वर्ग के लोग समाधिस्त हो जाते है । ये उस समय भी सुझाव मानते है और तन्द्रा टुट जाने पर भी सुझावो का पालन करते है केवल 15 प्रतिशत लोग पहले वर्ग मे आते है, जिन्हे आसानी से सम्मोहित हो जाते है । 40 प्रतिशत सो जाते है और छुकर कुछ न अनुभव करने की स्थिति मे उन्हे पहुचाया जा सकता है । 15 प्रतिशत को समाधिस्त अवस्था तक पहुचाया जा सकता है तथा शेष 20 प्रतिशत को गहन समाधि अवस्था तक पहुचाया जाता है इस सारे प्रयोगो से यह बात सिद्ध होती है की शायद सभी व्यक्तियों को सम्मोहित किया जा सकता है यदि सम्मोहन करने वाले का अपने पात्र से संबंध जुड़ जाए । हो सकता है सम्मोहित होने पर व्यक्ति दिए गए सुझावों का पालन करता है तन्द्रा मे ही नही, तन्द्रा के बाद भी उन सुझावो का पालन करना अनिवार्य समझता है । ये सुझाव इतने प्रभावकारी होते है कि इनसे व्यक्ति के बहुत से मानसिक रोग दुर किए जा सकते है किसी को तन्द्रा मे सुझाव दिया जाए सिगरेट पीते ही तुम्हारा सिर भारी होने लगेगा और तुम्हें चक्कर आएगें । जागने जब कभी यह सिगरेट पीने का प्रयास करेगा, उसका सिर भारी हो उठेगा और चक्कर आने लगेगें। इस तरह से उसे वस्तु के प्रति अरुचि पैदा हो जाएगी । इसी तरह शराब, जुआ आदि बुरी लतों से व्यक्ति आसानी से मुक्त हो सकता है मानसिक व्याधियां ही बहुत सी व्याधियो की जड़ है मानसिक रुप से यदि व्यक्ति को स्वस्थ, प्रफ़ुल्ल रखा जा सके तो संसार की आधि से अधिक बुराईयां समाप्त हो सकती है । हमारे मन एवं मस्तिष्क में बहुत सी ग्रन्थियां पैदा हो जाती है सम्मोहन से उनका कारण ढुंढ कर उनका निवारण किया जा सकता है बहुत सी पीड़ाओं एंव बिमारियों का जन्म हमारे विश्वास एंव संवेग के कारण होता है महिलाओं मे बचपन से यह विश्वास भर दिया जाता है कि प्रसव के समय उन्हे अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ता है यह बात हर बालिका के मन मे घर कर जाती है । इसलिए प्रसव के दौरान उसका अचेतन उसी के दर्द के अनुसार दर्द महसुस करने के लिए विवश करता है संसार के दुसरे कि स्त्रियों के अनुभवो से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रसव के समय स्त्री को बहुत अधिक दर्द महसुस करने कि जरुरी नही । विभिन्न अंगो को सम्मोहन द्वारा सुन्न करके आसानी से आप्रेशन किया जा सकता है रोगी को पता ही नही चलेगा की आप्रेशन किया जा रहा है मेरे पास एक ऐसा बालक आया जो मानसिक रोगी था । जिसे घर वालो ने ही नही अस्पताल वालो ने भी पागल घोषित कर दिया था । उन्होने उसके अच्छे होने की सभी संभावनाए छोड़ दी थी, इस बालक की सारी बातें सुनकर पता लगा कि बालक प्यार और सहानुभूति का भूखा है इसलिए ऐसा करता रहता था । सम्मोहन चिकित्सा के दौरान तन्द्रावस्था में बालक ने रोग का उपरोक्त कारण बताया । जब उसके माता-पिता को समझाने पर अपने व्यवहार मे परिवर्तन किया जिससे बालक अपने उपेक्षित न समझे तब इसके फ़लस्वरुप बालक पूर्ण स्वस्थ हो गया । जब तक मानसिक रोगी के रोग का मुल कारण न खोजा जाए, तब तक कोई भी सुझाव कारगर न हो पाता । कई बार एक विकार को समाप्त करने मे कई और विकारो को जन्म हो जाता है । सम्मोहन तन्द्रा में उस मुख्य ग्रन्थि का शीघ्र पता चल जाता है जो रोगी के विकास मे बाधक बनी हुई थी। एक रोगी सहानुभूति की आवश्यकता अनुभव पड़ने पर वह दमे के दौरे को आमत्रिंत कर लेता था जब उसके परिवार को हकीकत मालुम पडी और उनके व्यवहार मे परिवर्तन आया, रोगी के दौरे मे सुधार होने लगा । मेरे मतानुसार स्म्मोहन चिकित्सा तभी चिरकालिक सफ़ल सिद्ध हो सकती है जब रोगी के रोग से संबंधित लोगो की भी स्वभाव परिवर्तन हेतु चिकित्सा की जाए। अनेक विद्दार्थियों की स्मरण शक्ति मे चम्तकारिक सुधार सम्मोहन चिकित्सा के बाद आया । सम्मोहन द्वारा कार्यक्षमता मे भी वृद्धि कुछ लोगो मे की गई। आजकल रुस, अमेरिका, फ़्रांस आदि देशो मे सम्मोहन के माधयम से बहुत कार्य किए जा रहे है। किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखने से पुर्व उसे सम्मोहित किया जाता है और सुझाव दिए जाते है कि उस क्षेत्र मे अधिक कुशलता से कार्य करने के लिए उसे क्या क्या करना चाहिए। बहुत सी जगहों मे तो अभिनेताओं, लेखको और चित्रकारो को भी सुझाव दिए जा रहे है, ताकि वे अपन क्षेत्र मे बहुत अधिक सफ़लता प्राप्त करें सकें । कम समय मे विद्दार्थी को अधिक से अधिक सिखाने के लिए भी सम्मोहन का सहारा लिया जा रहा है रोग 2 प्रकार के होते है। एक वे जिनके कारण और कार्यक्षेत्र पुर्णत: शारीरक होते है इन्हे शरीर रोग कहा जाता है। दुसरे वे जिनके मूलत: मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन लक्षण पुर्णत: शारीरक होते है उनमें सम्मोहन से कोई लाभ नही होता । हां आपरेशन, दंत, प्रसुति आदि मे सम्मोहन द्वारा उनको पीड़ारहित बनाया जा सकता है अनेक शारीरक रोग ऐसे भी होते है जिनके कारण मनौविज्ञानिक होते है ऐसे रोगो को क्रियागत्त रोग (फ़लस्वरुप डिसीस) कहते है । प्राय: सभी क्रियागत रोगो मे सम्मोहन लाभदायक है कुछ ऐसे शारीरक रोग भी होते है जिनके मूल कारण तो मनौविज्ञानिक होते है, लेकिन उसके साथ कुछ शारीरक कारण भी मिश्रित होते है, ऐसे रोगो मे शारीरक चिकित्सा के साथ सम्मोहन चिकित्सा होनी चाहिए । सम्मोहन चिकित्सा द्वारा बुरी आदते शराब, सिगरेट से पुर्ण छुटकारा दिलाया जा सकता है सम्मोहन चिकित्सा द्वारा अनेक रोगी निम्न रोगो से लाभान्वित हुए।
सिरदर्द, कमर दर्द, पीठ दर्द, अनिद्रा, मानसिक तनाव, विषाद, लकवा, मिर्गी, कमजोर यादाश्त, हकलाना, तुतलाना, ह्रदय रोग, डर, नपुंसकता, कब्ज, मोटापा, कमजोर आखें, मनोविकार एंव अन्य ।
अपराधियों के अपराध का पता लगाने मे सम्मोहन बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है अपराधी को तन्द्रा की स्थिति मे पहुचाकर उसके जीवन के सारे अज्ञात रहस्य उजागर किए जा सकते है मैने बहुत से रोगियो का इलाज टेलीफ़ोन द्वारा भी किए है वह दिन दुर नही जब सम्मोहन चिकित्सा अपने क्षेत्र मे अस्वस्थ और स्वस्थ व्यक्तियो को रोगो के अज्ञात कारणो का पता करके लाभान्वित कर सकेगा ।
म्मोहन चिकित्सा के नए आयाम तंत्र मंत्र मन्त्र वशीकरण तन्त्र मन्त्र महामृत्य गायत्री सरस्वती मंत्र सम्मोहन महामृत्युंजयर तांत्रिक साधना वशीकरण वशीकरण कामदेव और जादू त्राटक साधना सम्मोहित करने त्राटक का जप तन्त्र शास्त्र सिद्ध स्तोत्र यन्त्र का जाप सरस्वती कात्यायनी सरस्वती सरस्वती साधना वशीकरण कर
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हकलाना और उनके प्रभाव
भाषण कठिनाइयाँ और उनके प्रभाव
यदि आप अपने भाषण के साथ कठिनाइयों है, तो आप अकेले नहीं हैं. ताजा आंकड़े कहते हैं कि लोगों के ऊपर एक प्रतिशत ब्रिटेन में एक हकलाना या हकलाना से पीड़ित हैं. इस अनुच्छेद के प्रभाव है कि बड़बड़ा रहे एक व्यक्ति के जीवन पर हो सकता है वर्णन करता है.
मैं किसी को जो एक या हकलाना क्या कुछ लोग एक हकलाना है कि मूल रूप से अठारह वर्ष के लिए अपना जीवन बर्बाद कर दिया था फोन पर काबू पाने किया है. बाईस साल की उम्र में, मैंने तय किया कि यह समय के प्रवाह को प्राप्त करने का प्रयास किया गया. बहुत मेहनत से काम करने के करीब एक साल बाद, मैं हकलाना दूर एक बार और सभी के लिए सफल रही है.
बड़बड़ा रहे विभिन्न तरीकों से लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन ये जिंदगी मैं मुश्किल पाया के पहलुओं थे:
लोगों का परिचय
खाद्य या पेय आदेश
टेलीफोन पर बोलते हुए
साक्षात्कार में शामिल
एक प्रेमिका को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा
दोस्त या परिवार के साथ सामाजिकता
सामान्य में हकलाना मुझे जीवन में दूसरा सबसे अच्छा और स्वीकार किया जीवन एक बहुत बड़ा संघर्ष किया. मैं एक विकलांगता बड़बड़ा पाया गया था और हमेशा के लिए हकलाना पिटाई पर तरीकों की तलाश में.
मैं साल की उम्र से भाषण चिकित्सा भाग चार या पांच. मेरे दृष्टिकोण संभवतः नहीं गया क्या था है अपने मन में चाहिए, मैंने हमेशा माना है कि वे नहीं सच में समझ के रूप में खुद को thay था एक हकलाना था कभी नहीं सकते कि मैं क्या देख रहा था.
स्टीव हिल सहित वेबसाइटों की एक संख्या
यदि आप अपने भाषण के साथ कठिनाइयों है, तो आप अकेले नहीं हैं. ताजा आंकड़े कहते हैं कि लोगों के ऊपर एक प्रतिशत ब्रिटेन में एक हकलाना या हकलाना से पीड़ित हैं. इस अनुच्छेद के प्रभाव है कि बड़बड़ा रहे एक व्यक्ति के जीवन पर हो सकता है वर्णन करता है.
मैं किसी को जो एक या हकलाना क्या कुछ लोग एक हकलाना है कि मूल रूप से अठारह वर्ष के लिए अपना जीवन बर्बाद कर दिया था फोन पर काबू पाने किया है. बाईस साल की उम्र में, मैंने तय किया कि यह समय के प्रवाह को प्राप्त करने का प्रयास किया गया. बहुत मेहनत से काम करने के करीब एक साल बाद, मैं हकलाना दूर एक बार और सभी के लिए सफल रही है.
बड़बड़ा रहे विभिन्न तरीकों से लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन ये जिंदगी मैं मुश्किल पाया के पहलुओं थे:
लोगों का परिचय
खाद्य या पेय आदेश
टेलीफोन पर बोलते हुए
साक्षात्कार में शामिल
एक प्रेमिका को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा
दोस्त या परिवार के साथ सामाजिकता
सामान्य में हकलाना मुझे जीवन में दूसरा सबसे अच्छा और स्वीकार किया जीवन एक बहुत बड़ा संघर्ष किया. मैं एक विकलांगता बड़बड़ा पाया गया था और हमेशा के लिए हकलाना पिटाई पर तरीकों की तलाश में.
मैं साल की उम्र से भाषण चिकित्सा भाग चार या पांच. मेरे दृष्टिकोण संभवतः नहीं गया क्या था है अपने मन में चाहिए, मैंने हमेशा माना है कि वे नहीं सच में समझ के रूप में खुद को thay था एक हकलाना था कभी नहीं सकते कि मैं क्या देख रहा था.
स्टीव हिल सहित वेबसाइटों की एक संख्या
माता पिता & हकलाना
जब एक व्यक्ति को एक हकलाना या एक माता पिता का एहसास है कि उनके बच्चे को हकलाना वे अक्सर बाहर कारणों का पता लगाने चाहते विकसित कर रहा है है. तो एक हकलाना क्या कारण हैं? जवाब है बहुत सी बातें हकलाना शुरू करने के लिए किसी को ट्रिगर कर सकते हैं. ये उनमें से कुछ हैं: यह एक दर्दनाक घटना यह परिवार के लोगों में चला सकते हैं स्कूल में एक दोस्त की नकल कर सकते हैं जो एक हकलाना है और फिर यह एक आक्रामक रिश्तेदार पिछले साल मैं एक महिला ग्राहक था पर चिपक जाती है, जो मुझे कहा था कि वह कैसे हो सकता है एक हकलाना विकसित की है. वह धाराप्रवाह था चौबीस साल की उम्र तक. इस उम्र में वह पहली बार, वह बहुत खुश था और एक माँ बनने के बारे में संभावनाओं के बारे में उत्साहित के लिए गर्भवती बन गया. वह जन्म और उसके दोस्तों के बारे में आशंकित था उसे घुमावदार गया है उसके कैसे दर्दनाक अनुभव कह रहा है. उसे पता था कि वे केवल चिढ़ा की कोशिश की और आराम के लिए बनाए गए थे. जन्म दिन आ गया है और दुर्भाग्य से प्रसव कड़ी particulary थी और वह बहुत बुरा कैसे यह वास्तव में किया गया के बारे में चौंक गया था. के बाद बच्चे का जन्म, जो एक स्वस्थ लड़का वह हकलाना विकसित की गई है. सभी लोग हैं, जो हकलाना यह एक कम उम्र, मेरे ग्राहकों के एक दूसरे से धाराप्रवाह था उन्नीस साल की उम्र तक. इस उम्र में वे एक कार दुर्घटना थी और यह उसे ट्रिगर हकलाना
कोई है जो एक हकलाना है मदद
कितने लोग धाराप्रवाह कभी क्या जीवन पर विचार के लिए किसी तरह एक हकलाना के साथ है? एक हकलाना के साथ जीवन के माध्यम से जा रहे हैं बहुत मुश्किल है, और कई बार हकला थोड़ा और compasion सराहना करते हैं. एक हकलाना खुद पर काबू पाने के बाद, मैं अपने दोस्तों से कुछ कहा होगा वे कैसे सोचा कि जीवन की तरह था, एक गंभीर हकलाना रहा. कहा कि मैं काफी कुछ अलग प्रतिक्रिया थी, जिनमें से कुछ मुझे जिम. नाराज: "मैं हमेशा सोचता था कि तुम थोड़ा के लिए अपने आप को माफ करना है और तुम बाहर कर दिया है कि आपके हकलाना कुछ बड़ी खतरनाक समस्या थी. यह आप की तरह बात नहीं कर सकता नहीं है महसूस किया यह सब में है? मैं भी कई बार महसूस किया है कि आप हिम्मत अभाव है, उदाहरण के लिए हमेशा पूछ टोनी तुम्हारे लिए पेय का आदेश है. "पॉल तो अपनी राय दी थी:" मैं यह काफी मजेदार है कि कई बार आप वास्तव में बात कर रही हो जाएगा अच्छी तरह से मिला है, लेकिन कुछ ही मिनटों के भीतर आपको एक शब्द भी बाहर नहीं. "Ashley में शामिल हो सकते हैं:" मैं तुम्हारे लिए एक खेद सा लगा, तुम संघर्ष देख रहा था, बहुत दर्द को देखो. "- यह एक बेहतर टिप्पणी थी! निगेल, एक और दोस्त:" मुझे खुशी है कि मैं हकलाना, नहीं है, लेकिन क्या मुझे लगता है कि तुम समझने की जरूरत है हूँ था कि तुम मुद्दों और समस्याओं के साथ केवल एक ही नहीं थे. मैं बहुत प्रभावित हूँ. मैं ज्यादातर जिम से टिप्पणी से नाराज़ हो गया था, और जवाब है कि आप इसे काबू पाने में कामयाब रहे हैं, हालांकि ":" तो तुम एक हकलाना है लगता है कि जिम तो बुरा नहीं है? ठीक है, मैं चुनौती तुम बार और व्यवस्था की हलके रंग की एक पिंट पर जाने के लिए, लेकिन जब तुम यह आदेश मैं तुम्हारे शब्दों में से कुछ पर हकलाना चाहता हूँ. "मैं उसे पता चला कि मैं कैसे उसे कहने के लिए आदेश है, जब हकलाना चाहता था आदि तो फिर मैं ने कहा: "के बाद आप शब्दों पर stammered है, मैं तुम्हें देखने के लिए कि यह कैसे लगता है और जिस तरह से लोगों को अपने आप को देखो अनुभव करना चाहता हूँ. तुम तो मैं क्या माध्यम से गया की थोड़ा और अधिक समझ सकते हैं. "जिम इस चुनौती से मना कर दिया, यहां तक कि उत्साह और हमारे समूह के विभिन्न सदस्यों से चिढ़ा की भारी राशि के बाद. एक हकलाना होने अच्छा जब कोई है जो एक हकलाना है मांगी मदद नहीं है और उन्हें अपना पूरा समर्थन प्रदान करें. मुझे में है कि मेरे कुछ दोस्तों को मेरे लिए पट्टी में जाना था और मेरे माता पिता बहुत कुछ फोन करने के लिए तैयार थे बहुत भाग्यशाली था कहता है, जैसे डॉक्टर को फोन और कार बीमा. मेरे जीवन में अन्य हालांकि समय कम, अन्य लोग मेरा मजाक बना दिया है और कई बार मैं बहुत निराश हो जाएगा और वापस ले लिया जाएगा और पता नहीं क्यों मुझे यह था जो एक हकलाना. स्टीफन हिल था -----
बचपन ka हकलाना
बचपन हकलाना
एक हकलाना बचपन में सामान्य लोगों के लिए शुरू होता है और अक्सर एक बचपन हकलाना के रूप में निर्दिष्ट है. इस बार बहुत माता पिता और बच्चे के लिए चिंतित है और यह पता है, जहां व्यक्ति कौन है हकलाना के लिए मदद मांगने के लिए मुश्किल है.
वहाँ हकलाना के कई प्रकार हैं. परिवार और दोस्तों को भी नहीं पता है कि एक व्यक्ति के वे जानते हैं कि एक हकलाना है हो सकता है. वजह यह है कि व्यक्ति को हकलाना छिपा कर सकता है, का उपयोग करके शब्द परिहार या शब्द प्रतिस्थापन.
अन्य लोगों को यह नहीं कर पा रहे हैं और क्या वे एक openely अधिक गंभीर हकलाना विचार किया जाएगा है.
एक हकलाना सामान्य अधिक हो जाता है जब एक इंसान है:
दबाव में
जब थक गया
नए लोगों की बैठक
एक असहज स्थिति में बोल
सवाल पूछ रही है, उदाहरण के लिए दिशाओं के लिए पूछ रहा
लोगों को शुरू
बड़बड़ा भी हकला के रूप में कुछ क्षेत्रों में जाना जा सकता है.
हकलाना चिकित्सा:
जो लोग एक हकलाना है जब विभिन्न चिकित्सा की मांग विकल्प हैं. वे एक भाषण चिकित्सक या भाषण रोगविज्ञानी के लिए जा सकते हैं. वैकल्पिक रूप से वे एक भाषण के पाठ्यक्रम में शामिल कर सकते हैं. इन पाठ्यक्रमों के एक समूह के आधार पर या एक से एक के आधार पर हो सकता है.
मैं व्यक्तिगत रूप से पसंद है और एक एक हकलाना पाठ्यक्रमों को सलाह के रूप में मेरा मानना है कि हर व्यक्ति जो एक हकलाना है एक और व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत प्रकार हकलाना है
एक हकलाना बचपन में सामान्य लोगों के लिए शुरू होता है और अक्सर एक बचपन हकलाना के रूप में निर्दिष्ट है. इस बार बहुत माता पिता और बच्चे के लिए चिंतित है और यह पता है, जहां व्यक्ति कौन है हकलाना के लिए मदद मांगने के लिए मुश्किल है.
वहाँ हकलाना के कई प्रकार हैं. परिवार और दोस्तों को भी नहीं पता है कि एक व्यक्ति के वे जानते हैं कि एक हकलाना है हो सकता है. वजह यह है कि व्यक्ति को हकलाना छिपा कर सकता है, का उपयोग करके शब्द परिहार या शब्द प्रतिस्थापन.
अन्य लोगों को यह नहीं कर पा रहे हैं और क्या वे एक openely अधिक गंभीर हकलाना विचार किया जाएगा है.
एक हकलाना सामान्य अधिक हो जाता है जब एक इंसान है:
दबाव में
जब थक गया
नए लोगों की बैठक
एक असहज स्थिति में बोल
सवाल पूछ रही है, उदाहरण के लिए दिशाओं के लिए पूछ रहा
लोगों को शुरू
बड़बड़ा भी हकला के रूप में कुछ क्षेत्रों में जाना जा सकता है.
हकलाना चिकित्सा:
जो लोग एक हकलाना है जब विभिन्न चिकित्सा की मांग विकल्प हैं. वे एक भाषण चिकित्सक या भाषण रोगविज्ञानी के लिए जा सकते हैं. वैकल्पिक रूप से वे एक भाषण के पाठ्यक्रम में शामिल कर सकते हैं. इन पाठ्यक्रमों के एक समूह के आधार पर या एक से एक के आधार पर हो सकता है.
मैं व्यक्तिगत रूप से पसंद है और एक एक हकलाना पाठ्यक्रमों को सलाह के रूप में मेरा मानना है कि हर व्यक्ति जो एक हकलाना है एक और व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत प्रकार हकलाना है
Tuesday, February 2, 2010
तुतलाना .हकलाता बन सकती है समस्या
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Thursday, December 24, 2009
Free Stammering Meeting (FSM )
फ्री हकलाहट मीटिंग का नाम ऍफ़ .एस ऍम मै दे रहा हु | मित्रो मै चाहता हु की हम सभी हकलाने वाले एक जगह प्रतेक रविवार को मिले और हकलाहट के सभी पहेलुऊ को बिस्तार से समझे ,मित्रो मै रविवार को आप सभी से मिलने के लिए समय देना चाहता हु ,मै चाहता हु की हम सब रविवार को मैहर में मिले और बाते करे | यदि कोई हकलाने वाला व्यक्ति है और वह रविवार को आता है हो मै उसे पूरा समय दुगा और हकलाहट की पूरी जानकारी दुगा | हमे आप लोगोसे बात करने में बहुत ख़ुशी होगी ,और गर्व भी होगा , और बहुत सी बातो पर चर्चा करना है आने में संकोच मत कीजिये अक्सर मै देखता हु की हकलाने वाले लोग मोबाईल में बात करने में संकोच करते रहते है | हमको गर्व होगा जब आप का फ़ोन आएगा ,मै पूरी लगन से ,ध्यान से , आप की बात सुनता हु , आपका स्वागत है मोबाईल में ,फ़ोन में ,मीटिंग में
Monday, December 21, 2009
How can you stammering Control

दोषतो मै आज आप से यह बताउगा की हकलाना को ठीक करने के लिए मेरे अन्दर हिम्मत कैसे आयी | मै ग्यारवी का पेपर दे रहा था तभी मेरे घर में राजदूत गाड़ी खरीदी गई | मै बहुत उत्सुक था गाड़ी चलाना सिखने के लिए ,मै पहले बंद गाड़ी को ही धकेलता था चुकी अंकल और पापा जी का डर हुआ करता था , बच्चो को गाड़ी चलाना अलाऊ नही था ,उनके घर पर न रहने पर घर के अन्दर ही गाड़ी को धकेलता था ,कभी गाड़ी में बैठ कर तो कभी गाड़ी के साथ पैदल चल कर | ऐसा १-२ माह चलता रहा ,एक दिन घर में कोई नही था तभी मै हिम्मत जुटाया और गाड़ी घर के बहार निकला और स्टार्ट करके गयर लगाया और क्लच जैसे ही छोड़ा गाड़ी बंद हो गई | बार बार यही होता और मै अन्दर से डर भी रहा था की ( अंकल आगये तो , गाड़ी भीड़ गयी तो ,गाड़ी गिर गयी तो ) लेकिन गाड़ी चलाना सीखना ही था | मै बार बार बार बार प्रयाश करता रहा सिखने के दौरान मेरे छोटे भाई को चोटभी आयी ,गाड़ी भी गिरी ,डाट भी पड़ी | फ़िर भी गाड़ी सिखा जब गाड़ी सिख रहा था तब बहुत डर था अंकल का ,गाड़ी गिरने का ,चोट लगने का ,गयर- क्लच -अक्सिलेटर -ब्रक, लगाने का | गाड़ी सिखने के बाद किसी का बिल्कुल भी डर नही रहा
शिक्षा
दोषतो एक तरफ मै गाड़ी सिख रहा था सफल हो रहा था दूसरी तरफ़ हकलाहट डिमक की तरह अन्दर ही अन्दर मुझे बर्बाद कर रही थी ,कुछ समझ में नही आरहा था की मै कैसे आंगे बढू ,क्या करू , जिस काम की सुरुआत करू उसी में हकलाहट की वजह से फ़ैल हो जाऊ
गाड़ी सिखने के बाद मै अन्दर से सोचा यार गाड़ी चलाना मै सिख सकता हु तो बोलना भी तो शीख सकता हु
और कहते है की यदि किसी काम को अन्दर से , मन से , संकल्प के साथ प्रतिज्ञा करके शुरू किया जाय तो वह उस काम का सफल रिसल्ट उसी समय तय हो जाता है, बाकि रहती है सिर्फ़ प्रोसेस | प्रोसेस कम्पलीट होने पर वही रिसल्ट मिलता है, जो आप ने शुरू में प्रतिज्ञा किया था | ये बात अवश्य है की प्रोसेस में कुछ कठिनाई ,कुछ उतर चड़ाव अवश्य आते है| यदि आप का लगन ,प्रतिज्ञा निश्चित है तो इन समश्यो को आसानी से जीता जा सकता है |
मैंने अपनी हकलाहट को कैसे कंट्रोल करना प्रारम्भ किया
मै कई स्पीच थेरापिस्ट , ई एन टी डॉक्टर से सुन चुका था और डिप्लोमा और सैकोलोजी ग्रेजू एसन से मुझे थेओरी पता हो चुकी थी की हकलाहट को कंट्रोल करने के कुछ स्टेप है
१-स्पीड धीमा करना :- स्पीड धीमा से मेरा मतलब यह नही है की विल्कुल धीमा बोलो , लेकिन सोफ्ट ,स्मूथ ,सपष्ट , बिना प्रेसर के बोलना चाहिए , लेकिन यह आसन काम नही था क्योकि हमारी आदत पीछेले २५ वर्ष से पक्की हो चुकी थी | मै जितना स्पीड कंट्रोल करता उतना ही मेरी स्पीड बढ रही थी ,मै कई बार ऐसा मह्सुश कर रहा था की यह न मुमकिन है ,बार बार प्रयाश करता और हर बार हार जाता , एक कविता को मै बार बार पढ़ता और फिर चार्ज हो जाता ,आप कविता सुनना चाहेगे
===========================================
लहरों से डर कर, नौका कभी पार नहीं होती |
कोशिश करने वालो की, कभी हार नहीं होती ||
एक नन्ही चीटी ,जब दाना लेकर चलती है |
चढ़ती दीवारों में ,सौ बार फिसलती है ||
चढं कर गिरना ,गिरकर चढ़ना न अखरता है |
मन का बिश्वश रगों में, सहस भरता है ||
आखरी उसकी मेहनत, बेकार नहीं होती |
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती ||
असफलता एक चुनौती है , स्वविकार करो |
देखो क्या कमी रह गयी है ,और सुधार करो ||
जब तक सफल न हो ,नीद जैन की त्यागो तुम |
संघ्रसों का मैदान छोड़, मत भोगो तुम||
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती
===========================================दोषतो बस यही कविता मुझे मोटीबेट करती थी और मै कभी पीछे मुड़कर देखा ही नहीं , मेरे मन में कभी ऐसी बात ही नहीं आई की मै मेरी हकलाहट ठीक नहीं होगी ,
Stammering Medicine
आप सब लोगो को बड़ी बेताबी से हकलाहट की दवाई खोजते नजर आते मै देखता हु | पहले मै भी ,यही सोचता था की कोई न कोई दवाई तो अवश्य होगी जो हमारी हकलाहट को ठीक कर देगी,कई डाक्टरों को हकलाहट के इलाज के लिए जाता था जैसे ही मन में आता की अब बोलना है की मै हकलाता हु, वैसे ही डर बोलता की- तुम्हारी बदनामी होगी मत कहो' डाक्टर हँसेगे, और मै बोलता की डॉक्टर साहब मुझे बुखार आती है , दवाई लेता और चला आता, एक बार हद तब हो गई जब मुझे बिना बुखार के, सूजी लगवानी पड़ी
दोषतो आप को हकलाहट की दवाई अवश्य मै दुगा जो मैंने खाई थी वह दवाई है विचारो को बदलने की ,थोडा थोडा डेली अपने आप को बदलने की ,हकलाहट को स्वाविकार करने की , ठीक बोलने की कोशिश करने की ,यदि आप केवल थोड़ी सा प्रयास करेगे , आपने आप को बदलने की, तो आप पायेगे की, आप तो थोड़ी प्रयास कर रहे है लेकिन भागवान आप को अधिक फल देगा | यहाँ मै कुछ बाते लिखता हु जो आप को सफलता अवश्य दिलाएगी
1- मुझे हमेशा याद रखना चाहिए की मै तनाव मुक्त्य ,निडर आत्मा विश्वाशी आराम से बोलने वाला आदमी हु |
२- आदत को सुधारना है थोडा अ आप को स्पीड धीमी करनी होगी | मै यहाँ पर एक बात कहुगा की हकलाने वाले लोग यह मानते ही नहीं की मै अधिक स्पीड से बोलता हु ,या जानते ही नहीं है की अनियंत्रित स्पीड हमारी हकलाहट का एक कारण है |
हमको कुछ बदलना पड़ेगा ,अपने आप को ,विचारो हो , स्पीच ओरगन के वोर्किंग करने के तरीको को , एक फ़ॉर्मूला याद आता है
चेंज ( अपने आप को ) = सुधार ( आप की स्पीच में )
१ स्पीड कण्ट्रोल २- आप की स्पस्ट आवाज आयेगी
२ -स्पीच ओरगोन २- चेहरा में सिकुडन ख़त्म होगी
३- हकलाना को स्वबिकर करो ३- डर दिमाग से Niklega
4-ध्यान से दुसरो की बात सुनो ४= अंसार देने ,और प्रशन पूछने का मनोबल बढेगा
५- स्माल स्माल वाक्य उपयोग करना ५=लम्बे समय तक बात कर सकते हो
दोषतो आप को हकलाहट की दवाई अवश्य मै दुगा जो मैंने खाई थी वह दवाई है विचारो को बदलने की ,थोडा थोडा डेली अपने आप को बदलने की ,हकलाहट को स्वाविकार करने की , ठीक बोलने की कोशिश करने की ,यदि आप केवल थोड़ी सा प्रयास करेगे , आपने आप को बदलने की, तो आप पायेगे की, आप तो थोड़ी प्रयास कर रहे है लेकिन भागवान आप को अधिक फल देगा | यहाँ मै कुछ बाते लिखता हु जो आप को सफलता अवश्य दिलाएगी
1- मुझे हमेशा याद रखना चाहिए की मै तनाव मुक्त्य ,निडर आत्मा विश्वाशी आराम से बोलने वाला आदमी हु |
२- आदत को सुधारना है थोडा अ आप को स्पीड धीमी करनी होगी | मै यहाँ पर एक बात कहुगा की हकलाने वाले लोग यह मानते ही नहीं की मै अधिक स्पीड से बोलता हु ,या जानते ही नहीं है की अनियंत्रित स्पीड हमारी हकलाहट का एक कारण है |
हम सबको थोडा सा स्पीड कम करना चाहिए ,बहुत से लोग कहते है की मै धीरे नहीं बोल सकता | मै आप से यह नहीं कह रहा हु की आप बिलकुल धीमा गाने जैसा बोलो ,लेकिन इतना कण्ट्रोल करो की आप के स्पीच ओरगन सही वर्क कर सके ,आप को बोलने का मौका मिले ,आप को सोचने का मौका मिले , आप की आवाज सुनने वालो को समझ में आनी चाहिए | अब सवाल यह है की मै कितना धीमा बी बोलु , आप स्याम अपनी आवाज सुनो ,और जो स्पीड आप को सुनने ,समझने में ठीक लगे वाही आप की सही स्पीड होगी ,प्रारंभ में आप थोडा और धीमा बोले तो बेहतर होगा ,लेकिन गाने जैसा नहीं बोलना चाहिए |
जब आप धीमा बोलने की कोशिश करेगे तो प्रारंभ में थोडा अटपटा लगेगा क्योकि आप अधिक स्पीड बोलने के आदि है| आप के मन में कुछ नेगतीवे विचार भी आयेगे जैसे मै कब तक धीमा बोलूगा , इतनी देर मेरी बात कौन सुनेगा , मै अभी नहीं बाद में धीरे बोलूगा , अभी यहाँ एसे ही बोलता हु बाद में सुधारुगा , सभीलोग तो स्पीड ही बोलते है वह क्यों नहीं अटकते है ,मै ही क्यों अटकता हु हमको कुछ बदलना पड़ेगा ,अपने आप को ,विचारो हो , स्पीच ओरगन के वोर्किंग करने के तरीको को , एक फ़ॉर्मूला याद आता है
चेंज ( अपने आप को ) = सुधार ( आप की स्पीच में )
१ स्पीड कण्ट्रोल २- आप की स्पस्ट आवाज आयेगी
२ -स्पीच ओरगोन २- चेहरा में सिकुडन ख़त्म होगी
३- हकलाना को स्वबिकर करो ३- डर दिमाग से Niklega
4-ध्यान से दुसरो की बात सुनो ४= अंसार देने ,और प्रशन पूछने का मनोबल बढेगा
५- स्माल स्माल वाक्य उपयोग करना ५=लम्बे समय तक बात कर सकते हो
Saturday, December 5, 2009
Sunday, November 15, 2009
हकलाहट का इलाज

दोस्तो मै हकलाहट को बहुत नजदीक से देखा हु
अब मै आप को बताउगा की इसका इलाज कैसे होता है
१-डर को काबू करना
२- वाणी दोष में सुधार लाना
आप ने कभी मोटर सईकल तो ड्राइव किया होगा जॉब आप से मोटर सईकल ड्राइव करते नही बनती थी तो कितना डर लगता था पर आज भिल्कुल नही ,क्यो ? आप ने कभी सोचा है ? मै बताता हु ----आप ने लगातार सिखने का प्रयाश किए है और आज सिख गए है ,सीखते सीखते आप का मन इसे ऑटो कर लिया है और अब स्वाम करवाता रहता है ,अब आप को बिल्कुल डर नही लगता है की मोटर सईकल भीड़ सकती है लेकिन रियल में भीड़ तो आज भी सकते है ना ? पर आप पुरी विश्वाश से कहते है की मेरे से नही भीड़ सकती
जब आप से गाड़ी ड्राइव करते नही बनती थी तब आप के मन में बहुत डर था पर आज नही
क्यो? इसे लिए क्योकि आपने सिखा है ठीक यही होती है हकलाहट ,आप भी सिख कर धेरे धीरे हकलाहट को कंट्रोल कर सकते है आइये हम बात करते है कैसे मुक्ति पअए
१ सबसे पहले आप यह निश्चय कर लीजिये की हमको ठीक होना है क्योकी निश्चय करने में ही आप को ७० % वर्क करना पड़ता है बहुत से लोगो को यह कहते हुए मै सुना हु की बहुत से डॉक्टर को दिखा चुका हु मेरी किस्मत में हकलाना ही लिखा है ऐसा वे ही लोग सोचते है जिनका "निश्चय " ही कमजोर होता है अतः आप को सबसे पहले यह निश्चय करना चाहिए की हमको ठीक होना है ,आप कहेगे की मै डेली निश्चय करता हु की ठीक होना है पर असफल हो जाता हु ऐसा क्यो ? आएये आप की मदत करता हु की निश्चय कैसे करना है ,निश्चय करने के से पहले आप को कुछ हकलाहट की सच्चाई जान्लेनी चाहिए
१-रातो रात यह ठीक नही होती है ----इसको ठीक करने का मतलब है की सुधार करना ,और सुधार धीरे धीरे ही किया जाता है सिर्फ़ तीन काम करके आप डॉक्टर , इंजिनियर बन सकते है
अ - देखना
बी- सुनना
सी - करना
कोई भी ट्रेनिंग हो यही मात्र तीन काम करना होता है ,जो सही तरीके से करता है वह बहुत आगे निकल जाते है
जो नही करते वह वाही रहते है
आपको भी दिन रात सपने देखना है की मै बिल्कुल ठीक बोलूगा ,सच बताओ आप ने कभी कहा है की मै ठीक बोलता हु नही न ,यदि आप झूंठ ही कहा होता की मै ठीक बोलता हु तो आज यहाँ आप यह नही पढ़ रहे होते अर्थात आप बिल्कुठीक बोलते ,सीधी सी बात है ,किसान सोचता है खेती करुगा ,करता है,सेठ सोचता है सामान बेचुगा बेचता है ,आप सोचते है हकलाता हु तो आप हकलाने ही ,मेरा कहने का मतलब आप जैसा सोचेगे वैसा ही बनेगे आप सोचते है मै हकलाता हु तो आप हकलाते है ,सबने पहले आप को आपनी सोच बदलनी पड़ेगी,और आप की सोच तब बदलेगी जब आप हकलाहट से दूर भागने के बजाय पास आयेगे ,दोस्ती करेगे ,आप के मन में फिर एक डर आयेगा की हम ठीक होना चाहते है और आप कहते है की दोस्ती करो मै समझाता हु
मान लीजिये आप पढाई कार रहे है और आप का छोटा बालक आप के पास आया और बोला पापा पापा हमको टॉफी चाहिए
Tuesday, July 14, 2009
आई बी एन सात में हकलाहट
आई बी एन सात में हकलाहट में पाच अप्रैल को वाणी दोष पर एक प्रोग्राम दिखाया गया है ,इसे आन लाइन
आज भी देख सकते है
आज भी देख सकते है
http://features.ibnlive.in.com/zindagilive_view.php?content_id=89568&i=7&start=
सतना स्टेमेरिंग एसोसीएसन
सतना स्टेमेरिंग एसोसीएसन में आप सबका स्वागत है ,यह ऐसे लोगो का एसोसीएसनहै जिन लोगो को वाणी दोष् तुतलाना हकलाना ,नाक से बोलना ,या अस्पस्ता आवाज की समस्या है , इस एसोसीएसन का उदेश निम्न लिखित है
हकलाहट मुक्त मेरा भारत
१- वाणी दोष् से पीड़ित लोगो की हर सम्भव मदत एवं जागरूपता प्रदान,करना
२- समाज और वाणी दोष् से पीड़ित लोगो के बीच मित्र भाव ,सहनभूति के सम्बन्ध बानाने में मदत करना
३- एक ऐसा प्लेट फार्म तैयार करना जिसमे प्रतेक हकलाने वाला व्यक्ति अपनी योगता ,कला को निखर सके
एक दुसरे को पहचान सके , अपना अनुभव ,सुख दुःख को बता सके ,
४- सरकार के सामने समस्या को रखना एवं उचित इलाज, प्रशिक्षण ,सहायता उपकरण ,आरक्षण ,अधिकार की मांग करना
५-उन सभी घटनों, बातो ,तरीको ,को रोकना जिन से वाणी दोष पीड़ित व्यक्ति की भावनाओ को ठेस पहुचाया जाता है
६-यदि परीक्षा के समय किसी परीक्षार्थी के हाथ में चोट आती है तो ,लिखने के लिए छोटी क्लास का एक दूसरालड़का दिया जाता है ,यदि वाणी दोष से पीड़ित व्यक्ति इंटर व्यू में बोल नही सकता तो लिख कर अपनी बात कहने का अवसर सरकार को देना चाहिए ......?
एक दुसरे को पहचान सके , अपना अनुभव ,सुख दुःख को बता सके ,
४- सरकार के सामने समस्या को रखना एवं उचित इलाज, प्रशिक्षण ,सहायता उपकरण ,आरक्षण ,अधिकार की मांग करना
५-उन सभी घटनों, बातो ,तरीको ,को रोकना जिन से वाणी दोष पीड़ित व्यक्ति की भावनाओ को ठेस पहुचाया जाता है
६-यदि परीक्षा के समय किसी परीक्षार्थी के हाथ में चोट आती है तो ,लिखने के लिए छोटी क्लास का एक दूसरालड़का दिया जाता है ,यदि वाणी दोष से पीड़ित व्यक्ति इंटर व्यू में बोल नही सकता तो लिख कर अपनी बात कहने का अवसर सरकार को देना चाहिए ......?
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